Saturday, May 23, 2020

Share Market (stock market) kya hai aur isme invest kaise karte hai?

Share Market (stock market)


Dosto share market ke baare me janane k liye aaj sabhi log utsuk hai. Magar Share market k baare me janane se pahle hume "Investment" aur "investment K Prakar" k baare me janana jaruri hai.

"Investment" kya hai?


Aaj k is mahangai k jamane me har aadmi paisa Kamana chahata hai. isliye wah vividh prakar ka "Vyavsay ya vyapar" Karta hai. yeh "Vyavsay ya Vyapar karne k liye wah Kuch paisa "nivesh" Karta hai aur us paise se aur paisa Kamata hai. kuch log mehnat majduri kar paisa kamate hai aur unhe lagta hai usne jo bhi kamaya hai usme Kuch paisa bache aur bache huye paise se aur paisa mil sake iske liye wah vibhinna prakar ke shceme me "nivesh" karta hai, ise hi "investment" kahate hai.
         Jyadatar log bank saving Karte hai, Ya fir property me invest karte hai, ya saving k saath saath Life insurance cover k liye L.I.C. me invest karte hai aur Bharat me jyada se jyada Gold me invest karte hai. Lekin in sabhi me invest Karne se jyada fayda share market me invest Karne se kaise ho sakta  ye mai apko niche bataunga.

Share Market Kya hota hai? (What is Share Market)


Humne logo Ko share market ya stock market shabd ka prayog karte huye aksar sunate hai, news channel pe bhi share market chadhane ya girne K baare me sunte hai, lekin share market k baare me bahut Kam log hi janate hai, is karan Kam log hi share market me invest karte hai aur paisa Kamate hai aur jinhe thodi bohot jankari hai wah share market me invest Kare ya na kare isi vichar me rahta hai aur adhe adhure knowledge K saath jo is me utarta hai wah apna paisa kho deta hai.
     Share market stock market Ke naam se bhi jana Jata hai. aur alag alag logodwara ise alag alag naam se bhi jaana jata hai. "Share" is english shabd ka hindi me arth hai "hissa (हिस्सा)". Share market ya stock market isi "हिस्सा " ya "share" wale siddhant Par chalta hai.
      Bombay Stock Exchange,Mumbai Bharat Ka Sabse bada stock exchange maana jaata hai. iski sthapna 1875 me Bharat K Pahle stock exchange k rup me ki gai thi. Bharat Ka dusra stock exchange "NSE (National stock Exchange) hai aur iski sthapana 1992 me hui thi.

Share- "Share" Ka arth hota hai "हिस्सा " aur share baazar me kisi company K hisse "Share" Kahte hai.

   Samjho kisi company ne 1 lakh shares jaari kiye hai aur kisi vyakti ne 40,000 shares Kharide to uski us company me 40% ki hissedari hogi. stock kisi bhi company me vyakti ki hissedari darshata hai aur wah jab chahe tab apne shares dusre vyakti Ko bech sakta hai ya dusre vyakti K shares kharid sakta hai.
   Company K shares ya stocks k mulya BSE me darj hota hai. Pure Share market me niyantran(control) banaye rakhne ka kaam "SEBI (Securities and Exchange Board of India)" Karti hai. Hindi me ise "भारतीय प्रतिभुती एवं विनिमय बोर्ड " Kahte hai. SEBI ki manjuri milne K baad hi koi company apna "Initial Public offering" jaari kar sakti hai. Isehi short me "IPO" Kahate hai.

Share Market me company Kab dikhti hai?

Share market me listed hone k liye company ko SEBI K saath likhit rup me kai Prakar K samjhote karne padte hai aur SEBI k sabhi niyamo (rules) Ka palan Karna padta hai. yadi koi company SEBI k niyamo ka palan nhi karti hai to us company ko market se hatane ka adhikar SEBI ko hai.
  Company dwara di gayi jaankari k aadhar par SEBI us company ka mulyankan karti hai aur is mulyankan k adhar Par mang badhne ya ghatne Par company k shares ki kimto me utar-chadhav hota hai.
   company Ko market me listed hone k liye company ki market me hissedari 25 cr se upar honi chahiye, IPO K liye company ki punji 10 Cr. aur FPO k liye 3 cr. honi chahiye. Iske alawa aur bahut se niyamo aur sharto se company ko gujrana padta hai aur kade niyamit ka palan karna padta hai.

Share/stock market me hum kis tarah paisa bana sakte hai?

Stock/share market me hum invest karke paise se paisa bana sakte hai. Lekin yeh kis prakar se kar sakte hai ye hume shares/stocks k prakar k adhar par achhi tarah samajh sakte hai.

Types of shares

Alag alag log shares k alag alag prakar batate hai, lekin shares k mukhya teen prakar niche diye hai.
  1. Common Shares- common shares wah shares hote hai jise koi bhi vyakti kabhi bhi bech sakta hai aur kabhi bhi khari sakta hai.
  2. Bonus Shares- jab company ko bada laabh hota hai tab company apne shareholder ko paisa n dekar uske badle kuch shares deti hai, tab un shares ko bonus shares kahte hai.
  3. Preferred Shares- Jab company ko paise ki jarurat hoti hai tab company market se paisa phutane k liye kuch shares kuch khas logo k liye hi jaati karti hai. Un shares ko "preferred shares" kahte hai.


Wednesday, April 22, 2020

जागतिक वसुंधरा दिन की शुरुआत कब और क्यो?

जागतिक वसुंधरा दिन 22 अप्रैल 



national earth day

 मानव जाति की शुरुआत में अन्न,वस्त्र, निवारा यह सीमित आवश्यकताएं थी। धीरे धीरे मानव की आवश्यकताएं बढ़ती गई। मानव विकास और उसकी सौंदर्य कल्पनाओं का परिणाम पर्यावरण संतुलन पर दिख रहा है। हमारी आंखों को सुंदर दिखने वाला पर्यावरण मानव जाति के भविष्य पर बुरा असर डालने वाला है। मानव जाति की स्वार्थ बुद्धि की वजह से ही आज संपूर्ण दुनिया इसकी कीमत चुका रहा है। खुद को बड़ा समझने वाला इंसान आज कोरोना जैसी महामारी से खुद ही घरों में कैद हो गया है।  यह भी इंसान की स्वार्थ बुद्धि और लालच का ही नतीजा है।


    हम हर साल 'जागतिक वसुंधरा दिन'मनाते हैं। इस समय हम अपनी पृथ्वी की रक्षा करने की शपथ लेते हैं पेड़ पौधे लगाते हैं सेल्फी निकालते हैं और अपने अपने काम पर लग जाते हैं। दिन खत्म होते ही वसुंधरा का महत्व भी खत्म हो जाता है और फिर याद आती है अगले साल । 364 दिन हम अपने पर्यावरण का भरपूर शोषण करते हैं। वसुंधरा का अर्थ होता है पृथ्वी और हमारी संस्कृति में पृथ्वी को माता मानते हैं। उसकी पूजा करते हैं। लेकिन यह संस्कृति आज केवल किताबों में ही कैद है या फिर सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने तक ही सीमित हो चुकी है।

कोरोना से प्रभावित लोगों के लिए वित्त मंत्री ने 1.70 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की  
  हमारे व्यस्त जीवन में वसुंधरा या पर्यावरण के लिए हमारे पास समय नहीं है। विकास के नाम पर मानव ने पृथ्वी का सुंदर रूप विद्रूप कर दिया है। मानव विकास की संकल्पना में सिर्फ मानव ही विकास का केंद्र बिंदु है जो करना है वह  सिर्फ मानव हित में ही हो, फिर चाहे पशु पक्षी पेड़ पौधे और अन्य जीव नष्ट ही क्यों ना हो जाए। क्षणिक सुख के लिए हम अपना भविष्य ही दाव पर लगा रहे हैं यह किसी ने सोचा भी नहीं। आज हमें बड़ी बड़ी इमारते चाहिए, बड़े रेलवे मार्ग चाहिए, बड़े-बड़े महामार्ग चाहिए, लेकिन यह करते समय पृथ्वी की कितनी हानि होती है यह किसी ने सोचा भी नहीं।
जागतिक वसुंधरा दिन

  मानव की यह गतिविधियां ही मानव के लिए खतरा बनता जा रहा है लेकिन इसकी और किसी का ध्यान भी नहीं जाता। आज विकास के नाम पर पेड़ पौधे तोड़े जा रहे और उनकी जगह बड़ी-बड़ी सीमेंट की इमारते खड़ी की जा रही है। बीते कई साल विकास की मूर्ख कल्पनाएं वास्तव में लाने के प्रयत्न में हमने अपनी ही वसुंधरा का इतना नुकसान कर दिया है कि आने वाले समय में पृथ्वी पर जीवन नष्ट होने का ही खतरा उत्पन्न हो चुका है।

 मानव ने स्वार्थ की वजह से आज जल हवा वायु प्रदूषित कर दिया है। अनगिनत पेड़ों को तोड़कर जल स्त्रोत ही नष्ट कर दिया है। अभी तो अप्रैल शुरू है और मई बाकी है लेकिन अभी से ही तापमान इतना बढ़ चुका है कि आने वाले दिनों में तापमान कितना बढ़ेगा यह सोच भी नहीं सकते। अगले साल क्या होगा यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जनवरी-फरवरी में अकाल कुए नदी तालाब सुख जाना पानी की खोज में दूर दूर तक जाना शहरों में पानी टंचाई फिर और गहरे बोरवेल बनाना नजर पहुंची वहां तक इमारत ही नजर आती है और पेड़ों का कुछ पता ही नहीं। फरवरी अप्रैल के बीच में ही देश के सामने पानी का खतरा उत्पन्न ना हो जाता है।


COVID- 19 की जानकारी देने के लिए सार्क (SAARC) ने शुरू की है वेबसाइट

 सौंदर्यीकरण के नाम पर विदेशी पेड़ों को लगाकर पर्यावरण का नुकसान हुआ है। ऑस्ट्रेलिया से नीलगिरी के पेड़ मादागास्कर से लाए गए गुलमोहर 70 के दशक में आयात किए गए गेहूं के साथ आए पेलट्रो फोरम, अकेशिया, स्पेथोडीया, कॅशिया, ग्लिरिसिडिया, फायकस, सप्तपर्णी रेनट्री इन पेड़ों ने हमारी हजारों एकड़ जमीन बर्बाद कर दिया है। यह विदेशी पेड़ और गाजर घास हमारे पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन चुके हैं। बड़ी महा मार्गों के दोनों तरफ यह पेड़ बहुत ज्यादा तादाद में दिखाई पड़ते हैं। हमारे जमीन का पानी यह पेड़ ज्यादा मात्रा में आकर्षित कर लेते हैं और इनका हमारे पर्यावरण के लिए बहुत ज्यादा उपयोग नहीं है। लेकिन हमारी आंखों को अच्छा लगता है इसलिए हम यह पेड़ लगाते हैं जबकि यह पशु पक्षियों को भी आकर्षित नहीं कर सकते हैं।

  आज विकास के नाम पर हमने जो पर्यावरण का नाश किया है उसका परिणाम मानव जाति पर और पर्यावरण पर दिखाई दे रहा है। मुंबई जैसे बड़े महानगरों में खेती योग्य जमीन इमारतों के लिए बर्बाद कर दिया है इस कारण यहां की जैव विविधता नष्ट हो चुकी है। हम पर्यावरण से संबंधित बड़े-बड़े उत्सव आयोजित करते हैं लेकिन वह सीमित रहता है।

  इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की बिक्री भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इस वजह से इ-वेस्ट की भयंकर समस्या उत्पन्न हो चुकी है। ई वेस्ट की वजह से जल प्रदूषण वायु प्रदूषण और जमीन का प्रदूषण हो रहा है।





  हमारे आसपास हर रोज पर्यावरण का नाश होता है और इसमें सरकार भी भागीदार है। इस समस्या को रोकने के लिए कुछ सामाजिक संस्थाएं पर्यावरण रक्षण के लिए प्रयास कर रहे हैं। अपनी पृथ्वी जैव विविधता और नैसर्गिक स्त्रोतों को बचाने का यथासंभव प्रयास कर रहे हैं।


 एक दिन के प्रयास से यह परिस्थिति सुधारने वाली नहीं है इसके लिए हमें हमेशा प्रयासरत रहना पड़ेगा। इसके लिए सामाजिक संस्थाएं सरकार और हमने मिलकर  प्रयास करना जरूरी है। हमें जो नैसर्गिक विरासत मिली है वह हमें हमाारी पिछली पीढ़ी की तरफ से मिली है। अब हमारा भी यह कर्तव्य हैै कि हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए हमने मिलकर पर्यावरण की रक्षा करना जरूरी है।




जाने वसुंधरा दिन के बारे में



जागतिक वसुंधरा दिन


  जागतिक वसुंधरा दिन पर्यावरण विषयक कार्यक्रमों को जागृत रखने का स्त्रोत है। इस दिन को मनाने का मकसद यही है कि संपूर्ण विश्व में लोगों में पर्यावरण संबंधी और अपनी पृथ्वी संबंधी जागरूकता निर्माण हो सके।
  
  पिछले 45 सालों से हर साल 22 अप्रैल को जागतिक वसुंधरा दिन के नाम से मनाया जाता है। सन 1970 के दशक में आधुनिक पर्यावरण मूवमेंट का जन्म यह दिन मनाने से ही हुआ है ऐसे बहुत से लोग मानते हैं। उस समय अमेरिकन लोग वी 8 सेडन इस बड़े वाहन का उपयोग करते थे। इस वाहन से निकलने वाला धुआं बड़ी मात्रा में वायु प्रदूषण करता था। कारखानों में से भी निकलने वाला धुआं और बिना किसी प्रक्रिया किए रसायन मिश्रित पानी बड़ी मात्रा में वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार थे। उन्हें कानून या मीडिया  का कोई डर नहीं था। जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण को उस समय समृद्धि का प्रतीक ही माना करते थे।

  उस समय पर्यावरण शब्द अलग ही अर्थ से लिया जाता था। पर्यावरण की चिंता किसी को भी नहीं थी। लेकिन सन 1962 में सागरी जीवशास्त्रज्ञ राचेल कार्सन लिखित साइलेंट स्प्रिंग यह किताब न्यूयॉर्क टाइम्स ने प्रकाशित की और इसी किताब की वजह से लोगों में पर्यावरण संबंधी जागृति होना शुरू हो गई। 24 देशों में इस किताब की 5 लाख प्रतियां बिक गई। इस किताब की माध्यम से कार्सन ने सजीव पर्यावरण और सार्वजनिक आरोग्य संबंध में की गई जागृति अन्य किसी व्यक्ति की तुलनाा में अधिक थी। इस बढ़ती जागृति में से ही 1970 में "वसुंधरा दिन" मनाने की कल्पना नेे जन्म लिया। वसुंधरा दिन मनाने की कल्पना सबसे पहले "गेलॉर्ड नेल्सन" ने रखी। नेल्सन उस समय अमेरिका के "विस्कॉन्सिन" राज्य के सीनेटर थे।



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Wednesday, April 1, 2020

IIT भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान

IIT भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान

  • IIT  का मतलब क्या है ? 
  • IIT का इतिहास
  • IIT संस्थान की सुची 
  • IIT का महत्त्व
  • IIT संयुक्त प्रवेश परिक्षा (IIT JEE)

यह संस्थान सुरुवात मे हिजली कारावास मे स्थित था। १५सितंबर १९५६ मे भारत की संसद ने "भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम " मंजूर कर इसे "राष्ट्रीय महत्व के संस्थान " घोषित किया।

IIT


IIT  का मतलब क्या है ? 

  IIT का मतलब होता है ('Indian Institute of Technology'. ) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान . 


IIT का इतिहास

  जोगेंद्र सिंह ने सन १९४६ मे भारत मे उच्च शिक्षा के संस्थानो की स्थापना के लिए एक समिती गठित की गई। नलिनी रंजन सरकार की अध्यक्षता मे गठित समिती ने शिफारिश की भारत भर मे ऐसे संस्थानो की स्थापना की जाए। इन शिफारिशो के अनुसार पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना कलकत्ता के खड़गपुर मे १९५० मे की गई। यह संस्थान सुरुवात मे हिजली कारावास मे स्थित था। १५सितंबर १९५६ मे भारत की संसद ने "भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम " मंजूर कर इसे "राष्ट्रीय महत्व के संस्थान " घोषित किया।
  इसी अधिनियम के आधार पर विभिन्न शहरो मे विभिन्न 
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित किये गये।


COVID- 19 की जानकारी देने के लिए सार्क (SAARC) ने शुरू की है वेबसाइट


IIT संस्थान की सुची 

भारत मे भारत सरकार द्वारा स्थापित कुल २३ प्रोद्योगिकी संस्थान है ।

१) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खडगपुर ( IITKGP)
स्थापना वर्ष -१९५१

२ ) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई (IITB)
स्थापना वर्ष - १९५८

३) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IITK)
स्थापना वर्ष - १९५९

४) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IITM)
स्थापना वर्ष - १९५९

५) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IITD)
स्थापना वर्ष - १९६१ संस्थान का दर्जा - १९६३

६) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (IITG)
स्थापना वर्ष - १९९४

७) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुडकी(IITR)
स्थापना वर्ष - १८४७
संस्थान का दर्जा - २००१

८) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड(IITRPR)
स्थापना वर्ष - २००८

९) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भुवनेश्वर(IITBBS)
स्थापना वर्ष - २००८

१०) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर(IITGN)
स्थापना वर्ष - २००८

११) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैद्राबाद (IITH)
स्थापना वर्ष - २००८

१२) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (IITJ)
स्थापना वर्ष - २००८

१३) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना (IITP)
स्थापना वर्ष - २००८

१४) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर (IITI)
स्थापना वर्ष - २००९

१५) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (IITMandi)
स्थापना वर्ष - २००९

१६) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) वाराणसी (IIT BHU)
स्थापना वर्ष - १९१९ 
संस्थान का दर्जा - २०१२

१७) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पलक्कड (IIT PKD)
स्थापना वर्ष - २०१५


१८) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुपती (IITTP)
स्थापना वर्ष - २०१५

१९) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ( भारतीय खनी विद्यापिठ) धनबाद (IITISM)
स्थापना वर्ष - १९२६
संस्थान का दर्जा - २०१६

२०) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई (IITBh)
स्थापना वर्ष - २०१६

२१) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गोवा (IITGoa)
स्थापना वर्ष - २०१६

२२) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जम्मू (IITJM)
 स्थापना वर्ष - २०१६

२३) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान धारवाड (IITDH)
 स्थापना वर्ष - २०१६
 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मे शिक्षित अभियंताओ तथा शोधकर्ताओ की पहचान पुरे विश्व मे होती है।
इन प्रसिद्धी के कारण भारत मे अमियांत्रिकी की पढ़ाई का इच्छुक हर विधार्थी इन संस्थानो मे प्रवेश पाने की महत्त्वकांक्षा रखता है। इन संस्थानो मे स्नातक की पढाई के लिए प्रवेश पाने के लिए एक संयुक्त प्रवेश परीक्षा होती है, जिसे JEE के नाम से जानते है।


IIT संयुक्त प्रवेश परिक्षा (IIT JEE)

  IIT JEE की परिक्षा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानो मे स्नातक स्तर पर प्रवेश के लिए ली जाती है। इसमे गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान विषयो के प्रश्न होते है। 
 अप्रैल २०१३ से ही आय आय टी प्रवेश परिक्षा दो हिस्सो मे ली जाती है। एक है मेन और दुसरा है एडवांस। आय आय टी मे आवेदन करने वाले विद्यार्थी पहले मेन परीक्षा देते है और इसमे सफल विद्यार्थी आगे एडवांस परीक्षा के लिए पात्र होते है।

कोरोना व्हायरस (COVID-19) क्या है ?




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Wednesday, March 25, 2020

COVID- 19 की जानकारी देने के लिए सार्क (SAARC) ने शुरू की है वेबसाइट

 COVID- 19 की जानकारी देने के लिए सार्क (SAARC) ने शुरू की है वेबसाइट

       सार्क के सभी सदस्य देशों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वीडियो कांफ्रेंस में इसका प्रस्ताव रखा था। वेबसाइट में दर्शाया गया है कि सदस्य देशों में कोरोना वायरस से संक्रमित कितने लोग हैं।
      सार्क दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन ने हाल ही में कोरोना वायरस से संबंधित जानकारी देने के लिए वेबसाइट शुरू की है। इस वेबसाइट में सदस्य देशों में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या दर्शाई गई है। यह वेबसाइट www.covid19-sdmc.org यह है। इस वेबसाइट पर विजिट करके हम सार्क देशों में कितने  मरीजों की संख्या है यह जान सकते हैं।


सार्क

         इस संगठन के सदस्य देशों के नेताओं के साथ हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस किया था और उसके द्वारा इनके सामने यह प्रस्ताव रखा था। इस वेबसाइट में यह दर्शाया गया है कि सदस्य देशों में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या कम से कम 1647 है। इस पर दर्शाया गया है कि भारत में कोरोना वायरस से 9 लोगों की मौत हो चुकी है। पाकिस्तान में 6 और बांग्लादेश में 4 लोगों की मौत हो चुकी है।

       click here- कोरोना व्हायरस (COVID-19)


सार्क



सार्क (SAARC) COVID-19 आपातकालीन निधि


        सार्क COVID-19 आपातकालीन निधि मे भारत स्वेच्छा से अपनी तरफ से योगदान दे रहा है जबकि बाकी के  देशों में नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान ,मालदीव और भूटान भी शामिल हो गए हैं। भारत में सार्क वीडियो कांफ्रेंस में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए 10 मिलीयन यूएसडी निधि स्थापित किया है। भूटान और मालदीव के परीक्षण उपक्रम, सैनिटाइजर और अन्य चिकित्सा अनुरोध जैसी आपूर्ति भी भारत ने भेज दी है। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सार्क देश एक महत्वपूर्ण रणनीति तैयार कर रहे हैं।


सार्क (SAARC) के बारे में के बारे में


        दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन दक्षिण एशिया के 8 देशों का राजनीतिक और आर्थिक सहयोग संगठन है। SAARC का मतलब है  South Asian Association for Regional Cooperation । 08 दिसंबर 1985 को सार्क संगठन की स्थापना भारत,  बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान ,मालदीव, श्रीलंका इन देशों द्वारा मिलकर की गई थी। अप्रैल 2007 में संघ के 14वें शिखर सम्मेलन मे अफगानिस्तान इसका आठवां सदस्य बना। बांग्लादेश के उस समय के राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने 1970  के दशक में दक्षिण एशियाई देशों के एक व्यापार गुट के सूजन का प्रस्ताव रखा था। सार्क का संचालन मंत्री परिषद द्वारा नियुक्त महासचिव करते हैं। इनकी नियुक्ति 3 साल के लिए देशों के वर्णमाला क्रम के अनुसार की जाती है।  सार्क दक्षिण एशिया का महत्वपूर्ण संगठन है।
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Sunday, March 15, 2020

कोरोना व्हायरस (COVID-19)

  कोरोना व्हायरस

  • कोरोना व्हायरस क्या है ?
  • COVID-19 कैसे फैला है ?
  • यह नया कोरोना व्हायरस मनुष्य मे कैसे फैल गया?
  • COVID-19 के लिए incubation period क्या है?
  • COVID-19 के लक्षण  क्या है ?
  • COVID-19 का निदान कैसे किया जाता है?

  • COVID-19 का इलाज कैसे किया जाता है?
  • क्या COVID-19 मौत का कारण बनता है?
  • क्या यह कोरोनवायरस वायरस से अलग है?
  • इस कोरोनावायरस से आप अपनी रक्षा कैसे करें?
  • कोरोनावायरस के लिए क्या सावधानियां हैं?
कोरोना व्हायरस क्या है ?
       कोरोना व्हायरस को COVID-19 के नाम से भी जाना जाता है । 
COVID -19 का मतलब

  •  CO = CORONA,
  •  VI= VIRUS,
  • D= December
  • 19= 2019
   यह वायरस मुकुट जैसा दिखाई देता है । मुकुट को चिनी भाषा मे कोरोना कहते है  और यह दिसंबर 2019 मे पाया गया,इस कारण इसे COVID-19 नाम दिया गया ।

COVID-19 नए कोरोना व्हायरस के कारण होने वाली बीमारी है जो दिसंबर 2019 को चीन में सामने आई थी। COVID-19 के लक्षणों में खांसी, सर्दी और सांस लेने में तकलीफ होती है । COVID-19 गंभीर हो सकता है और मौत का कारण भी बन सकता है । नया कोरोना व्हायरस एक व्यक्ती से दुसरे व्यक्ती में भी फैल सकता है । इसका निदान प्रयोगशाला परीक्षण से किया जाता है । अब तक कोई कोरोना वायरस की वॅक्सिंन नहीं बनी है । इस कारण रोक थाम के उपाय में बार बार हाथ धोना, सर्दी और खांसी होने पर घर से बाहर न निकलना यह कार्य करना जरूरी है ।
          कोरोना  व्हायरस एक प्रकार का विषाणू है । यह व्हायरस कई प्रकार के विषाणुओ का समूह है और यह कुछ बीमारीयो का कारण बनते हैं । COVID-19 से सास लेने में तकलीफ होती है और इसकी शुरुआत चीन में हुई ।

COVID-19 कैसे फैला है ?
           हाल ही की जानकारी के अनुसार यह कहा जाता है कि कोरोना वायरस एक व्यक्ती से दुसरे व्यक्ती तक  पहुंचाया जा सकता है । इसका सामुदायिक प्रसार भी हो सकता है । सामुदायिक प्रसार का मतलब है के लोग किसी विशेष क्षेत्र में वायरस से संक्रमित हो गए हैं, इनमें से कुछ लोग यह भी बता नही सकते  कि वो कहा और कैसे संक्रमित हो गए हैं । COVID-19 को चीन में और अमेरिका के साथ -साथ 100 देशों में पाया गया है ।
         इस नये प्रकार के कोरोना व्हायरस की निगरानी विश्व स्वास्थ्य संघटन और दुनियाभर में जॉन हाफकिन्स जैसे स्वास्थ्य संघटनो के केंद्रो द्वारा की जा रही है ।  30  जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संघटन ने,  COVID-19 वायरस के प्रकोप को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात्कालीन घोषित किया है ।

यह नया कोरोना व्हायरस मनुष्य मे कैसे फैल गया?
           COVID-19 दिसंबर2019 में चीन के वूहान शहर में पाया गया । हालाकी स्वास्थ्य अधिकारी अभी भी इस वायरस  के स्त्रोत का पता लगा रहे हैं , प्रारंभिक तर्क यह था की यह वुहान के समुद्री भोजन बाजार से जुड़ा हो सकता है । बाजार का दौरा करने वाले लोगों में कोरोना वायरस के कारण व्हायरल से  कुछ विशिष्ट प्रकार का न्युमोनिआ पाया गया।  25 जनवरी 2020 को सामने आया एक अध्ययन  बताता है कि पहले रिपोर्ट कीया गया व्यक्ती 1 दिसंबर 2019 को बीमार हो गया था और उसका सीफूड मार्केट से कोई संबंध नहीं था । इस वायरस की उत्पत्ती और प्रसार कैसे हुआ इसकी जॉंच चल रही हैं ।

COVID-19 के लिए incubation period क्या है?
        वायरस से  संक्रमिक लोगों में 14  दिनो के बाद लक्षण दिखाई  दे रहे हैं ।

COVID-19 के लक्षण  क्या है ?
COVID-19 के लक्षणो मे शामिल हैं:

  •    सर्दी, 
  • खासी और 
  • सांस की कमी ।

   कुछ  दुर्लभ मामलों में COVID-19 गंभीर श्वसन समस्याओ, गुर्दे की विफलता या मृत्यू का कारण बन सकता है । यदि आपको बुखार या सांस लेने में किसी प्रकार की कठिनाई हो रही है , तो स्वास्थ्य चिकित्सक से सलाह ले और  तात्काल देखभाल सुविधा या आपत्कालीन कक्ष में जाने से पहले अपने लक्षणो को डॉक्टर को फोन पे बताए।   
    यदि आप के पास एक चिकित्सा आपातकाल हेै, तो   कॉल करें और अपने लक्षणो के बारे में बताए। रोक थाम के लिए सीडीसी केंद्र चले जाए।
कोरोनावायरस क्या है?

COVID-19 का निदान कैसे किया जाता है?
COVID-19 का इलाज कैसे किया जाता है?
       अब तक, वायरस का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। सीओवीआईडी ​​-19 से बीमार होने वाले लोगों को सहायक उपायों के साथ इलाज किया जाना चाहिए: वे जो लक्षणों से राहत देते हैं। गंभीर मामलों के लिए, उपचार के लिए अतिरिक्त विकल्प हो सकते हैं, जिसमें अनुसंधान दवाएं और चिकित्सीय भी शामिल हैं।

क्या COVID-19 मौत का कारण बनता है?
       12 मार्च, 2020 तक, 4,718 मौतों का श्रेय COVID-19 को दिया गया है। हालांकि, 68,310 लोग बीमारी से उबर चुके हैं। यह जानकारी जॉन्स हॉपकिंस सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग द्वारा विकसित कोरोनवायरस सीओवीआईडी ​​-19 ग्लोबल केस मैप से मिली है।

क्या यह कोरोनवायरस वायरस से अलग है?
सार्स गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम के लिए खड़ा है। 2003 में, SARS का प्रकोप चीन में शुरू हुआ और 2004 में समाप्त होने से पहले अन्य देशों में फैल गया। COVID-19 का कारण बनने वाला वायरस 2003 के SARS प्रकोप के समान है: दोनों ही कोरोनाविरस के प्रकार हैं। बहुत कुछ अभी भी अज्ञात है, लेकिन सीओवीआईडी ​​-19 2003 एसएआरएस की तुलना में तेजी से फैलता है और इससे गंभीर बीमारी भी हो सकती है।

इस कोरोनावायरस से आप अपनी रक्षा कैसे करें?
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) में ये सुझाव हैं:


  •  कम से कम 20 सेकंड के लिए अपने हाथों को बार-बार और अच्छी तरह से धोएं। 
  • यदि साबुन और पानी उपलब्ध नहीं हैं, तो अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
  • एक खांसी के साथ खांसी और छींक को कवर करें, फिर ऊतक को कूड़े में फेंक दें।
  • अपनी आंखों, नाक या मुंह को अनचाहे हाथों से छूने से बचें।
  • बीमार होने पर घर पर रहें।


कोरोनावायरस के लिए क्या सावधानियां हैं?

      चीन और अन्य देशों की कई स्वास्थ्य एजेंसियां, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका में रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) शामिल हैं, इस बीमारी पर कड़ी नजर रख रही हैं और इसे फैलने से रोकने के लिए कदम उठा रही हैं।

अपडेट के लिए, रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) पर जाएं।
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